चुनाव से ठीक पहले क्या बाहर आएंगे केजरीवाल? सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला; ED कर रही विरोध

दिल्ली शराब घोटाला मामले में जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत (Arvind Kejriwal Interim Bail) मिलेगी या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार यानी कि आज फैसला सुना सकता है. दरअसल प्रवर्तन निदेशालय कुछ खास दलीलों के साथ जमानत दिए जाने का विरोध कर रहा है. ईडी के एक अधिकारी ने टीओआई से कहा कि अगर केजरीवाल (Arvind Kejriwal Bail Hearing) को चुनाव प्रचार करने के लिए अंतरिम जमानत दी गई, तो इससे डिब्रूगढ़ जेल में बंद खालिस्तान समर्थक ‘वारिस पंजाब दे’ नेता अमृतपाल सिंह को भी खडूर साहिब से चुनाव लड़ने में मदद मिलेगी. वह भी प्रचार के नाम पर अंतरिम जमानत मांग रहा है.सुप्रीम कोर्ट ने पहले संकेत दिया था कि वह मौजूदा लोकसभा चुनाव को देखते हुए अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने पर विचार कर सकती है. अदालत ने कहा था कि यह एक असाधारण स्थिति है और सीएम केजरीवाल आदतन अपराधी नहीं हैं. लेकिन ईडी की दलील कुछ और भी है.सुप्रीम कोर्ट ने 7 मई को हुई सुनवाई के दौरान कहा था कि अगर केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया जाता है, तो भी वह आधिकारिक कर्तव्य नहीं निभा सकेंगे. वह मुख्‍यमंत्री के तौर पर ऑफिशियल ड्यूटी करते है तो ये कनफ्लिक्ट होगा. ईडी ने बुधवार को सर्वोच्च अदालत में हलफनामा पेश कर कहा कि चुनाव प्रचार (Election Campaign) करना कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है. अगर चुनाव प्रचार करने के लिए बेल दी गई तो फिर तो किसी नेता को गिरफ्तार करना ही मुश्किल हो जाएगा. ईडी ने अदालत को मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका को खारिज करते समय की गई उस दलील को याद दिलाया, जिसमें कहा गया था कि कानून नागरिक, संस्था और राज्य सभी के लिए बराबर होता है. कानून सभी को बराबर का अधिकार देता है.प्रवर्तन निदेशालय की दलील है कि पहले तो चुनाव प्रचार करना संवैधानिक अधिकार नहीं, फिर अरविंद केजरीवाल तो चुनाव लड़ भी नहीं रहे हैं. अगर कोई उम्मीदवार भी कस्टडी में होता तो भी उसे खुद के चुनाव प्रचार के लिए जमानत नहीं दी जा सकती. ईडी ने तगड़ी दलील देते हुए अदालत से ये भी कहा कि पिछले 5 साल में देश भर में कुल 123 चुनाव हुए हैं. अगर नेताओं को चुनाव प्रचार के आधार पर जमानत दी जाने लगी तो न तो कभी किसी नेता हो गिरफ्तार किया जा सकेगा और न ही उसे न्यायिक हिरासत में भेजा जा सकेगा, क्योकि देश में कोई न कोई चुनाव तो हमेशा ही होता रहता है. अरविंद केजरीवाल की लीगल टीम ने ED के हलफनामे पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है. कहा गया है कि सुनवाई पूरी होने के बाद और के फैसले से ठीक पहले हलफनामा पेश करना कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है. खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लिए बिना ईडी ने यह हलफनामा दाखिल किया है.ईडी ने कहा कि दिल्ली सीएम को अंतरिम जमानत देना समानता के नियम के खिलाफ है. यह संभव नहीं है कि एक छोटे किसान या एक छोटे कारोबारी का काम रोक दिया जाए और एक नेता को चुनाव प्रचार की अनुमति दे दी जाए. ईडी ने केजरीवाल के व्यवहार के बारे में सुप्रीम कोर्ट को याद दिलाते हुए कहा कि यही अरविंद केजरीवाल थे, जिन्होंने ईडी के समन को चुनाव प्रचार का हवाला देते हुए दरकिनार कर दिया था.दिल्ली के सीएम केजरीवाल को 21 मार्च को शराब नीति घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था, तब से वो हिरासत में हैं. दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को उनकी न्यायिक हिरासत 20 मई तक बढ़ा दी थी.

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